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  1. क्या RBI के रेपो रेट घटाने पर बैंक के लिए नेट इंटरेस्ट मार्जिन टारगेट हासिल करना होगा मुश्किल, क्या बोले SBI चेयरमैन?

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क्या RBI के रेपो रेट घटाने पर बैंक के लिए नेट इंटरेस्ट मार्जिन टारगेट हासिल करना होगा मुश्किल, क्या बोले SBI चेयरमैन?

Upstox

2 min read | अपडेटेड November 26, 2025, 15:15 IST

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सारांश

मौद्रिक नीति समिति ने 2025 की पहली छमाही में ब्याज दरों में कुल 100 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की थी, लेकिन अगस्त से इस पर रोक लगी हुई है। अक्टूबर में हुई बैठक के मिनट्स से पता चलता है कि एमपीसी सदस्यों ने संकेत दिया है कि देश महंगाई परिदृश्य ज्यादा नरम होने पर भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश है।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया

आरबीआई के रेपो दर घटाने पर भी एनआईएम लक्ष्य हासिल करने का भरोसाः एसबीआई चेयरमैन

State Bank of India (SBI) यानी कि भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने बुधवार को कहा कि बैंक अगले सप्ताह नीतिगत ब्याज दर में 0.25% की कटौती होने की स्थिति में भी अपना 3% शुद्ध ब्याज मार्जिन (Net Interest Margin, NIM) का टारगेट हासिल करने को लेकर आश्वस्त है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि रेपो रेट को कम करने की गुंजाइश बरकरार है, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि अगले सप्ताह रेपो रेट में कटौती होगी।

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शेट्टी ने पीटीआई के साथ बातचीत में कहा कि रिजर्व बैंक नीतिगत रेपो दर पर अगले सप्ताह एक मुश्किल फैसला लेगा, लेकिन बैंक का अनुमान है कि अगर ब्याज दर में कटौती होती है, तो यह सिर्फ .25% की मामूली कटौती होगी, जिसका मार्जिन पर खास प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बैंक के पास अपने एनआईएम को बनाए रखने के लिए कई उपाय हैं। इसमें नकद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio, CRR) में 1% कटौती का पूरा फायदा, पहले उच्च दरों पर की गई फिक्स्ड डिपॉजिटों (एफडी) का पुनर्मूल्यांकन और बैंक खाते की .2% दर कटौती शामिल है।

उन्होंने यह भी बताया कि बैंक की केवल 30% परिसंपत्तियां रेपो दर से संबद्ध हैं, लिहाजा रिजर्व बैंक की दर कटौती का प्रभाव सीमित रहेगा। उन्होंने कहा कि सितंबर तिमाही में एसबीआई ने एनआईएम को .03 % बढ़ाकर 2.93% किया था और इसके आधार पर वह चालू फाइनेंशियल ईयर के अंत तक एनआईएम 3% से अधिक रहने को लेकर आश्वस्त हैं। मौद्रिक नीति समिति ने 2025 की पहली छमाही में ब्याज दरों में कुल 100 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की थी, लेकिन अगस्त से इस पर रोक लगी हुई है। अक्टूबर में हुई बैठक के मिनट्स से पता चलता है कि एमपीसी सदस्यों ने संकेत दिया है कि देश महंगाई परिदृश्य ज्यादा नरम होने पर भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश है।

PTI इनपुट के साथ
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