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Helium Shortage: मिडिल ईस्ट संघर्ष से ग्लोबल हीलियम संकट, चिपमेकिंग और स्मार्टफोन प्रोडक्शन पर पड़ सकता है असर

Upstox

2 min read | अपडेटेड March 27, 2026, 13:25 IST

सारांश

Helium असल में नेचुरल गैस से निकलने वाला एक बाय-प्रोडक्ट है, जो LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) प्रोसेसिंग के दौरान मिलता है। इसलिए इसकी सप्लाई पूरी तरह गैस प्रोडक्शन पर डिपेंड करती है। अगर LNG प्रोडक्शन या सप्लाई चेन में दिक्कत आती है, तो हीलियम की उपलब्धता भी कम हो जाती है।

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Helium की कमी का असर दुनिया भर के सेमीकंडक्टर प्लांट्स पर दिखने लगा है।

ईरान-इजराइल युद्ध के बीच एक नई समस्या खड़ी हो गई है। 19 मार्च को ईरान ने कतर के Ras Laffan LNG हब पर हमला किया, जिससे हीलियम की सप्लाई पर असर पड़ा है। इससे सेमीकंडक्टर, स्मार्टफोन प्रोडक्शन और PCB (प्रिंटेड सर्किट बोर्ड) सेक्टर के लिए खतरा पैदा हो गया है। बता दें Helium एक बहुत जरूरी गैस है जो सेमीकंडक्टर चिप बनाने में इस्तेमाल होती है। इसकी सबसे बड़ी बात ये है कि इसका कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

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क्यों अहम है हीलियम

हीलियम असल में नेचुरल गैस से निकलने वाला एक बाय-प्रोडक्ट है, जो LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) प्रोसेसिंग के दौरान मिलता है। इसलिए इसकी सप्लाई पूरी तरह गैस प्रोडक्शन पर डिपेंड करती है। अगर LNG प्रोडक्शन या सप्लाई चेन में दिक्कत आती है, तो हीलियम की उपलब्धता भी कम हो जाती है। अभी इसी वजह से ग्लोबल लेवल पर हीलियम और दूसरे इंडस्ट्रियल गैसेज की कमी देखने को मिल रही है।

सेमीकंडक्टर प्लांट्स पर असर

इस कमी का असर दुनिया भर के सेमीकंडक्टर प्लांट्स पर दिखने लगा है। खासकर चीन और ताइवान जैसे देशों में कई फैक्ट्रियां अब पहले की तरह 24 घंटे नहीं चल पा रही हैं, बल्कि हीलियम की कमी के कारण प्रोडक्शन 16 घंटे तक सीमित करना पड़ रहा है। कुछ जगहों पर सरकारों ने इंडस्ट्रियल गैस के इस्तेमाल पर भी पाबंदी लगा दिए हैं, जिससे प्रोडक्शन और प्रभावित हो रहा है।

भारत पर क्या हो सकता है असर

एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत के लिए इसका असर दो तरह से हो सकता है। पहला, जो डोमेस्टिक सेमीकंडक्टर और PCB मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स बन रही हैं, उन पर दबाव बढ़ सकता है। अगर helium की कमी जारी रहती है, तो प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ेगी और सप्लाई घटेगी। दूसरा, जो भारतीय कंपनियां इंपोर्टेड चिप्स पर निर्भर हैं, उन्हें पहले से ही डिलीवरी में देरी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके प्रोडक्शन शेड्यूल प्रभावित हो रहे हैं।

हालांकि अभी भारत थोड़ा सुरक्षित है, क्योंकि यहां सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम अभी शुरुआती स्टेज में है। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह लंबे समय तक चलता रहा, तो आगे चलकर भारत की मैन्युफैक्चरिंग भी प्रभावित हो सकती है, खासकर जब कैपिसिटी बढ़ेगी।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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