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  1. स्टील सेक्टर के लिए कोकिंग कोयले पर निर्भरता, स्क्रैप की कमी बड़ी चुनौतियां

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स्टील सेक्टर के लिए कोकिंग कोयले पर निर्भरता, स्क्रैप की कमी बड़ी चुनौतियां

Upstox

2 min read | अपडेटेड June 26, 2025, 16:42 IST

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सारांश

एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। देश के बुनियादी ढांचे और विनिर्माण पारिस्थितिकी की रीढ़ माना जाने वाला स्टील इंडस्ट्री फाइनेंशियल ईयर 2030-31 तक 30 करोड़ टन सालाना कच्चे स्टील की क्षमता हासिल करने के सरकार के लक्ष्य की तरफ कदम बढ़ा रहा है।

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स्टील सेक्टर के लिए कोकिंग कोयले पर निर्भरता, स्क्रैप की कमी बड़ी चुनौतियां

महत्वाकांक्षी उत्पादन क्षमता हासिल करने की कोशिशों में जुटे भारतीय स्टील सेक्टर को आयातित कोकिंग कोयले पर अधिक निर्भरता और स्टील स्क्रैप की सीमित उपलब्धता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। देश के बुनियादी ढांचे और विनिर्माण पारिस्थितिकी की रीढ़ माना जाने वाला स्टील इंडस्ट्री फाइनेंशियल ईयर 2030-31 तक 30 करोड़ टन सालाना कच्चे स्टील की क्षमता हासिल करने के सरकार के लक्ष्य की तरफ कदम बढ़ा रहा है। एमपी फाइनेंशियल एडवाइजरी सर्विसेज ने एक बयान में कहा, ‘फाइनेंशियल ईयर 2024-25 तक भारतीय स्टील इंडस्ट्री ने 20.5 करोड़ टन प्रतिवर्ष की स्थापित क्षमता हासिल कर ली है। इसके बाद प्रमुख स्टील कंपनियां 2031 तक 16.7 करोड़ टन प्रतिवर्ष की क्षमता विस्तार करने की तैयारी में हैं।’

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हालांकि, स्टील सेक्टर को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें लौह अयस्क के शुद्धीकरण की जरूरत, आयातित कोकिंग कोयले पर 85% निर्भरता, स्टील स्क्रैप (कबाड़) की सीमित उपलब्धता और इस्पात बनाने की प्रक्रिया में उच्च कार्बन उत्सर्जन शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से कम लागत वाले आयात, यूरोपीय संघ में लगे सुरक्षा शुल्क और संभावित कार्बन शुल्क जैसी बाधाएं भी घरेलू स्टील इंडस्ट्री के विकास के लिए जोखिम बढ़ा रही हैं।

इसने कहा कि नई स्टील प्रोजेक्ट्स के लिए मंजूरी में अधिक समय लगने और सबसे बड़े स्टील उत्पादक चीन की तुलना में वित्तपोषण की लागत ऊंची रहने से भी कई समस्याएं पैदा हो रही हैं। हालांकि, रिपोर्ट कहती है कि स्टील क्षमता के लक्ष्य को बहुआयामी रणनीति के जरिये हासिल किया जा सकता है। यह हरित और मूल्यवर्धित स्टील में त्वरित निवेश, बुनियादी ढांचे एवं कच्चे माल के बीच के संबंध में सुधार, स्वच्छ प्रौद्योगिकी को अपनाना, वित्तपोषण एवं अनुमोदन के लिए नीतिगत सुधार और मजबूत सार्वजनिक-निजी निष्पादन मॉडल पर निर्भर करेगा।

एमपी फाइनेंशियल एडवाइजरी सर्विसेज के संस्थापक और प्रबंध साझेदार महेंद्र पाटिल ने कहा, ‘इनोवेशन और टिकाऊपन के सहारे संसाधन, नीति और व्यापार चुनौतियों पर काबू पाना भारत को हरित और विशिष्ट स्टील के लिए एक ग्लोबल सेंटर बनाने के लिए महत्वपूर्ण होगा।’

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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